बुधवार, 13 अगस्त 2014

अर्धत्व

अधूरेपन में छिपी है
एक चाह,
एक ललक
अपूर्णता की गहनता में
समाई है एक आशा
कुछ प्राप्त करने की
क्योंकि
अर्धत्व में छिपा है
सौंदर्य
तभी तो
अर्धचन्द्र पर लिखी जाती है
कविताएं
अधूरे प्रेम की कहानियां
होती है
जग में मशहूर
अर्धसत्य के
खोजे जाते हैं साक्ष्य
और
अर्धत्व की पूर्णता
पूजित होती है
नारी-नटेश्वर में ...।
                     ---------- स्वर्णलता

                           

गुरुवार, 16 जनवरी 2014

सुकरात


अमृत की  चाह में
कितने घूंट
हलाहल का पान
किन्तु
नीलकंठ नहीं बन पाई...

विष मेरे हलक से
नीचे उतर चुका था
किन्तु नहीं बना
यह कृष्ण  का
चरणामृत...
जिसे पीकर मीरा
भक्ति  के चरम को
छू गई...

इस गरल ने
मुझे क़र दिया
समाप्त
और मृत्युदंड को प्राप्त
मैं बन गई
सुकरात.........!!!
                                   ---स्वर्णलता